Yogi Government 2.0: सीएम योगी के 100 दिन का एजेंडा ही मंत्रियों के काबिलियत की परीक्षा!

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संकेत मिश्र

लखनऊ. यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने सभी मंत्रियों को उनके विभागों की कार्य योजना तय कर दी है. सौ दिन में इस कार्ययोजना पर अमल की तैयारियों के निर्देश दे दिए हैं. सीएम की मंशा साफ है कि विभागों में बेहतरी से कार्य हों और आम जनता को सीधे योजनाओं को फायदा पहुंचे. लेकिन कई विभाग ऐसे हैं जिनमें हर कदम पर चुनौतियां हैं.

पीडब्ल्यूडी मंत्री की यह रही चुनौतियां?
पीडब्ल्यूडी में पिछले कई मंत्रियों ने सिर्फ अफसरों के साथ विभागीय बेहतरी के लिए बैठकें की लेकिन उस विभाग के संघ के पदाधिकारियों से दूरी बनाए रखी. जिससे मंत्रियों को विभाग के बारे में जो अफसरों ने बताया वही नजर आया और विभाग में भ्रष्टाचार का काकश पनपने के साथ ही विभाग और कार्यदाई संस्थाएं सेतु निगम और निर्माण निगम घाटे में चले गए. संघ और अफसरों के साथ बैठक करने से पारदर्शी सूरत विभाग की मंत्री के सामने आती और सुधार की सलाह भी मिलती. यूपी की सबसे ख्याति प्राप्त बिल्डिंग निर्माण की कार्यदाई संस्था निर्माण निगम को कई राज्यों में काम नहीं मिल रहा.

उत्तराखंड में निर्माण निगम पर से ब्लैक लिस्टेड का लेबल हटाने की चुनौती है. जबकि निर्माण निगम कभी छह हजार करोड़ का टर्न ओवर था अब महज दो हजार करोड़ बचा है. उत्तराखंड में ब्लैक लिस्टेड, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, आसाम बिहार , पश्चिम बंगाल में यूपीआरएनएन को पहले की तरह काम नहीं मिलने की चुनौती दिख रही है. वहीं ईपीसी मोड पर दूसरे राज्य असम समेत अन्य राज्यों में कार्य किए जा रहे लेकिन यूपी में सीलिंग लगी होने से यूपी में प्रॉजेक्ट नहीं मिल रहे.

पीडब्ल्यूडी ने तीन साल में 13 मेडिकल कालेज में एक भी नहीं बने जबकि निर्माण निगम ने आठ से ज्यादा मेडिकल कालेज योगी सरकार में बनाए. पीडब्ल्यूडी ने एक मेडिकल कालेज बनाने में लागत 320 करोड़ हुई जबकि निर्माण निगम ने 260करोड़ में मेडिकल कालेज बनाए. छह हजार करोड़ वाले निर्माण निगम का टर्न ओवर महज दो हजार करोड़ बचा है. पांच साल में निर्माण निगम में इंजीनियरों का यांत्रिक संवर्ग का कोई प्रमोशन नहीं हुआ. जिससे इंजीनियरों में रोष है.

निर्माण निगम के इंजीनियर खाली ले रहे सैलरी!
निर्माण निगम वाले जेई को प्रमोशन नहीं मिलने से उनके बैचमेट पीडब्ल्यूडी में प्रमोशन पाकर चीफ इंजीनियर हो गए. हर साल डीपीसी होनी चाहिए लेकिन पांच साल से प्रमोशन नहीं मिलने से इंजीनियरों का मनोबल कमजोर हुआ. निर्माण निगम के इंजीनियर खाली सैलरी ले रहे और उनकी जगह पीडब्ल्यूडी से डेपुटेशन पर तैनात इंजीनियर जिम्मेदार पदों पर काबिज है.

यूपी सेतु निगम अब निजी कंपनियों के सहारे
सेतु निगम ने एक दौर में ईराक नेपाल से लेकर देश के कई राज्यों में ब्रिज बनाए हैं. अब नौबत यह है कि अपने ब्रिज प्राईवेट कंपनियों को बनाने को दे रहे हैं. अयोध्या में चार ब्रिज सेतु निगम को बनाने थे वह वार्टिकल टेंडर से निजी कंपनियों को दे दिए. जबकि सरकार सेतुनिगम को कार्यदेती है. सिक्योरिटी सेतुनिगम की जमा होती और काम निजी कंपनियां करती हैं.

ऊर्जा विभाग भी 90 हजार करोड़ के घाटे में ….
यूपी के ऊर्जा विभाग भी घाटे में है. ऊर्जा विभाग 90 हजार करोड़ के कर्ज तले दबा है. लगातार इंजिनियर आंदोलनरत हैं.

चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के ढांचे को दुरूस्त करना
चिकित्सा एवम स्वास्थ्य विभाग के ढांचे को दुरूस्त करना बड़ी चुनौती है. रेफरल सिस्टम, ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना. इसके अलावा सरकारी सेवाएं छोड़ रहे डाक्टरों को बेहतर माहौल देना.

आपके शहर से (लखनऊ)

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