8वें वेतन आयोग में 65% तक बढ़ सकती है सैलरी, HRA और DA पर आई बड़ी अपडेट – 8th Pay Commission News

By: Sagar Charpe

On: Friday, July 3, 2026 8:48 PM

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8th Pay Commission News: 7th Pay Commission के बाद अब देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और मेट्रो शहरों में रहने के खर्च को देखते हुए विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार और वेतन आयोग के सामने भत्तों (Allowances) और सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलावों की मांग रखी है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि अगर उनकी इन मांगों को हरी झंडी मिल जाती है, तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में 65 फीसदी तक का भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

बढ़ते खर्चों के बीच मौजूदा भत्तों को नाकाफी बताते हुए देश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों—जैसे AINPSEF, NC-JCM, AIDEF, FNPO और IRTSA—ने अपनी मजबूत सिफारिशें सौंपी हैं। इन सिफारिशों में मुख्य रूप से महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज करने, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) की दरों को बढ़ाने और फैमिली यूनिट के कैलकुलेशन को बदलने पर जोर दिया गया है। कर्मचारी नेताओं का मानना है कि दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में लेवल 1 के कर्मचारियों के लिए मौजूदा भत्तों में गुजारा करना काफी मुश्किल हो रहा है, इसलिए एक सम्मानजनक पैकेज मिलना बेहद जरूरी है।

फैमिली यूनिट बदलने से फिटमेंट फैक्टर में आएगा बंपर उछाल

कर्मचारी संगठनों ने एक बेहद दिलचस्प प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत फैमिली यूनिट (पारिवारिक इकाई) के मानक को मौजूदा 3.0 से बढ़ाकर 4.4 या 5 सदस्य करने की मांग की गई है। अगर इस फॉर्मूले को माना जाता है, तो फिटमेंट फैक्टर में सीधे तौर पर करीब 46.66% की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। यह बदलाव कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) के आधार को पूरी तरह बदल देगा। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये अभी संगठनों द्वारा रखे गए शुरुआती प्रस्ताव हैं और अंतिम फैसला सरकार तथा 8वें वेतन आयोग की मंजूरी के बाद ही होगा।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर क्या है डिमांड?

अलग-अलग शहरों की कैटेगरी (X, Y, Z) के हिसाब से संगठनों ने HRA में बड़े बदलावों की वकालत की है:

  • AINPSEF का प्रस्ताव: इन्होंने X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% HRA की मांग की है।
  • NC-JCM, AIDEF और FNPO की संयुक्त मांग: इन संगठनों ने सीधे तौर पर X, Y और Z कैटेगरी के शहरों के लिए क्रमशः 40%, 35% और 30% HRA देने की बात कही है। इसके साथ ही इन्होंने HRA को सीधे महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ने और इसका फायदा पेंशनभोगियों को भी देने की सिफारिश की है।
  • IRTSA का सुझाव: इन्होंने 40%, 30%, 20% और 10% का स्लैब सुझाया है, साथ ही यह भी कहा है कि जब भी DA में 25% की बढ़ोतरी हो, तो HRA भी ऑटोमैटिकली 25% बढ़ा दिया जाना चाहिए।

ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) और सिटी कॉम्पेन्सेटरी अलाउंस (CCA) पर अपडेट

ट्रेवलिंग के बढ़ते खर्च को देखते हुए AINPSEF ने प्रस्ताव दिया है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस बेसिक पे का कम से कम 12% होना चाहिए, जिसकी न्यूनतम सीमा 9,000 रुपये प्रति महीना तय हो। दूसरी तरफ, NC-JCM, AIDEF, FNPO और IRTSA जैसे संगठनों ने मौजूदा ट्रांसपोर्ट अलाउंस को सीधे तीन गुना करने और उसे भी डीए (DA) के साथ लिंक करने की मांग की है। इसके अलावा, शहरों के महंगे रहन-सहन को देखते हुए सिटी कॉम्पेन्सेटरी अलाउंस (CCA) को दोबारा शुरू करने और इसके दायरे में आने वाले शहरों की लिस्ट को बड़ा करने की मांग भी उठाई गई है।

महंगाई भत्ते (DA) के कैलकुलेशन में सुधार की मांग

डीआई (Dearness Allowance) को लेकर ज्यादातर संगठनों का एक सुर में कहना है कि जैसे ही महंगाई भत्ता 25% के आंकड़े पर पहुंचे, इसे तुरंत बेसिक पे (मूल वेतन) में मर्ज कर दिया जाना चाहिए। FNPO ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सुझाव दिया है कि DA का कैलकुलेशन छह महीने के औसत के आधार पर पॉइंट-टू-पॉइंट होना चाहिए ताकि कर्मचारियों को राउंडिंग ऑफ (अंकों को पूर्णांक बनाने) में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। वहीं, IRTSA ने मौजूदा CPI-IW 2016 इंडेक्स की जगह एक नया शहर-आधारित कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) लाने की मांग की है ताकि कर्मचारियों को वास्तविक महंगाई के हिसाब से भत्ता मिल सके।

न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) को 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव

सबसे बड़ा बदलाव देश के सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी में देखने को मिल सकता है। परिवार के सदस्यों की संख्या के नए मानकों के आधार पर AINPSEF, NC-JCM, AIDEF और FNPO ने न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये प्रति माह करने की सिफारिश की है। वहीं, IRTSA ने माता-पिता और बच्चों को मिलाकर 4.6 से 4.8 सदस्यों की फैमिली यूनिट के आधार पर न्यूनतम वेतन 52,600 रुपये तय करने का सुझाव दिया है। यदि इनमें से कोई भी प्रस्ताव मंजूर होता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल जाएगा।

Sagar Charpe

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