धान और बाजरा की बुवाई में आई तेजी, पर इन बड़ी फसलों का रकबा घटा, देखें पूरा आंकड़ा

0
धान और बाजरा की बुवाई में आई तेजी, पर इन बड़ी फसलों का रकबा घटा, देखें पूरा आंकड़ा

भारतीय कृषि और किसानों के लिए जून का महीना बेहद महत्वपूर्ण होता है। देश में मानसून के आगे बढ़ने के साथ ही खेतों में हलचल तेज हो गई है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) दिल्ली द्वारा जारी 12 जून 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में अब तक कुल 84.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। हालांकि, पिछले साल (2025) की समान अवधि में यह आंकड़ा 88.04 लाख हेक्टेयर था, यानी इस बार कुल बुवाई में 3.44 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, धान और श्रीअन्न (मोटे अनाज) की बुवाई के आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं।

धान की खेती में जबरदस्त तेजी, बाजरे ने भी चौंकाया

इस साल भारतीय किसानों का झुकाव धान की खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 12 जून 2026 तक धान का रकबा बढ़कर 4.98 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी समय तक महज 3.88 लाख हेक्टेयर था। इसका सीधा मतलब है कि धान की बुवाई में 1.09 लाख हेक्टेयर का बड़ा उछाल आया है।

इसके साथ ही, सरकार द्वारा प्रमोट किए जा रहे ‘श्रीअन्न’ यानी मोटे अनाजों के प्रति भी किसानों का भरोसा बढ़ा है। मोटे अनाजों का कुल रकबा पिछले साल के 4.32 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 4.77 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसमें सबसे ज्यादा बढ़त बाजरे की खेती में देखी गई है, जो पिछले साल के 0.24 लाख हेक्टेयर से सीधे छलांग लगाकर 1.15 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है।

दालों और कपास के रकबे में आई गिरावट, पैदावार पर पड़ सकता है असर

जहाँ एक तरफ धान और बाजरा मुस्कुरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दलहन (दालों) और कपास के आंकड़े थोड़ी चिंता बढ़ा रहे हैं। दालों की बढ़ती कीमतों के बीच इस साल शुरुआत में दलहन का रकबा घटा है। पिछले साल 12 जून तक जहाँ 2.73 लाख हेक्टेयर में दालें बोई गई थीं, वहीं इस साल यह घटकर 1.55 लाख हेक्टेयर रह गया है।

  • अरहर का रकबा इस बार 0.09 लाख हेक्टेयर है (पिछले साल 0.21 था)।
  • उड़द की बुवाई 0.27 लाख हेक्टेयर में हुई है (पिछले साल 0.35 था)।
  • मूंग का रकबा घटकर 0.69 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 1.54 लाख हेक्टेयर था।

इसके अलावा, सबसे बड़ा झटका कपास (Cotton) की खेती को लगा है। पिछले साल इस समय तक 13.19 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी, जो इस साल भारी गिरावट के साथ केवल 9.53 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है। यानी कपास के रकबे में अकेले 3.66 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।

तिलहन और गन्ने की स्थिति कैसी है?

खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता के लिहाज से तिलहन की फसलें काफी अहम हैं। इस साल तिलहन का कुल रकबा 3.51 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल (3.54 लाख हेक्टेयर) के लगभग बराबर ही है। इसमें मूंगफली की बुवाई में थोड़ी तेजी (2.57 लाख हेक्टेयर) देखी गई है, जबकि सोयाबीन का रकबा 0.70 लाख हेक्टेयर के साथ पिछले साल से थोड़ा पीछे चल रहा है। वहीं, देश की प्रमुख नकदी फसल गन्ने की बात करें तो इसकी बुवाई 54.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल के 54.29 लाख हेक्टेयर के लगभग करीब है।

निष्कर्ष और आगे की राह

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जून के शुरुआती हफ्ते में बुवाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव होना आम बात है। जैसे-जैसे मानसून पूरे देश को कवर करेगा, दलहन और कपास के रकबे में भी सुधार आने की पूरी उम्मीद है। धान की बंपर शुरुआत से उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल चावल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर जा सकता है। गूगल डिस्कवर और एडसेंस के लिहाज से यह रिपोर्ट दर्शाती है कि आने वाले दिनों में बाजार में कमोडिटी की कीमतें कैसी रहने वाली हैं।

Related Articles You Might Enjoy:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *