VB-G RAM G 2026: ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका को एक नया और मजबूत आधार देने के लिए केंद्र सरकार ने आज यानी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में एक क्रांतिकारी योजना को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। इस नई योजना का नाम “विकसित भारत – ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन गारंटी” (Vikas Bharat – Guarantee for Employment and Livelihoods Mission-Rural) यानी शार्ट में VB-G RAM G है।
इस ऐतिहासिक कानून के जमीन पर उतरते ही देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए दैनिक मजदूरी की दरों में बड़ा इजाफा कर दिया गया है। नए नियमों के तहत अब ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मिलने वाली औसत दैनिक मजदूरी पहले के 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये प्रति दिन हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश स्तर पर मजदूरों की रोजाना की कमाई में औसतन 28.6 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नई मजदूरी दरों से जुड़ी बड़ी और मुख्य बातें
सरकार द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस नए कानून में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो सीधे तौर पर गरीब और मजदूर परिवारों को आर्थिक संबल देंगे:
- 300 रुपये की न्यूनतम सीमा तय: नए कानून के तहत सरकार ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि देश के किसी भी राज्य में न्यूनतम मजदूरी दर 300 रुपये प्रति दिन से कम नहीं होगी। यानी अब किसी भी मजदूर को 300 रुपये से कम दिहाड़ी नहीं दी जा सकती। इस फैसले से देश की औसत मजदूरी दर में 10% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है।
- बजट का भारी-भरकम आवंटन: इस महत्वाकांक्षी योजना को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट आवंटित कर दिया है।
- पुराने जॉब कार्ड रहेंगे मान्य: सरकार ने साफ किया है कि जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं हो जाते, तब तक जिन मजदूरों के पास पहले से ई-केवाईसी (e-KYC) वेरिफाइड जॉब कार्ड मौजूद हैं, वे पूरी तरह से मान्य रहेंगे और उनके आधार पर काम मिलता रहेगा।
- ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका: योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने का जिम्मा पहले की तरह ग्राम पंचायतों के पास ही रहेगा। इसके तहत मुख्य रूप से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कामों पर फोकस किया जाएगा।
अलग-अलग राज्यों में अब कितनी मिलेगी मजदूरी?
देश के 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर 300 रुपये के अंतरिम बेस रेट पर ला दिया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 फीसदी तक का बड़ा उछाल देखने को मिला है। इससे पहले कई राज्यों में मजदूरी दरें 300 रुपये से काफी नीचे थीं, जहां न्यूनतम अधिसूचित मजदूरी महज 241 रुपये प्रति दिन थी।
अगर देश के अन्य राज्यों की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में सबसे ज्यादा लगभग 24.5% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं कुछ चुनिंदा राज्यों में नई अधिसूचित दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
- हरियाणा: 409 रुपये प्रति दिन
- गोवा: 406 रुपये प्रति दिन
- केरल: 401 रुपये प्रति दिन
- सिक्किम (ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र): 450 रुपये प्रति दिन
फिलहाल देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस अधिनियम के लिए अपने बजट का प्रावधान कर लिया है, जबकि 24 राज्यों ने अपनी खुद की ‘VB-G RAM-G’ राज्य योजनाओं को भी नोटिफाई कर दिया है।
अब साल में कितने दिनों का मिलेगा गारंटी रोजगार?
पहले की पुरानी व्यवस्था (मनरेगा) के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष के भीतर केवल 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती थी। लेकिन आज से लागू हुए इस नए कानून के बाद पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। यानी अब मजदूरों को साल में 25 दिन ज्यादा काम मिलेगा, जिससे उनकी सालाना आमदनी में सीधे तौर पर बड़ा इजाफा होना तय है।
रोजाना की दिहाड़ी में कितनी हुई कुल बढ़ोतरी?
सरकार ने इस नई ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरी दरों में औसतन 28.6 रुपये प्रति दिन की बढ़ोतरी की है। इस बदलाव के बाद अब देश भर में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। आप चाहे किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में रहते हों, आपको सरकार द्वारा तय की गई नई और बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी का लाभ सीधे आपके बैंक खाते में मिलना शुरू हो जाएगा।










