मल में खून आना (Rectal Bleeding) एक ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग बवासीर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर बार इसकी वजह बवासीर नहीं होती। कई मामलों में यह पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), डाइवर्टिकुलर डिजीज, पेट या आंतों के अल्सर, कोलन पॉलीप्स और यहां तक कि कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मल में दिखाई देने वाले खून का रंग इस बात का संकेत देता है कि ब्लीडिंग पाचन तंत्र के किस हिस्से से हो रही है। इसलिए यदि स्टूल में बार-बार खून दिखाई दे या इसके साथ पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर या वजन कम होने जैसे लक्षण हों, तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
मल में खून आना क्या होता है?
मल के साथ खून निकलने की स्थिति को मेडिकल भाषा में रेक्टल ब्लीडिंग (Rectal Bleeding) कहा जाता है। इसमें खून गुदा, मलाशय या पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से से आ सकता है। यह टॉयलेट पेपर, कमोड या मल में मिला हुआ दिखाई दे सकता है।
मल में खून का रंग क्या बताता है?
1. चमकीला लाल खून (Bright Red Blood)
यदि टॉयलेट पेपर या मल की सतह पर चमकीला लाल खून दिखाई दे, तो यह आमतौर पर गुदा या बड़ी आंत के निचले हिस्से से ब्लीडिंग का संकेत होता है।
संभावित कारण
- बवासीर (Hemorrhoids)
- गुदा में दरार (Anal Fissure)
- रेक्टल इंफेक्शन
- निचली आंत में सूजन
2. गहरा लाल या मैरून रंग का खून
यदि मल गहरे लाल या मैरून रंग का दिखाई दे, तो इसका मतलब हो सकता है कि ब्लीडिंग बड़ी आंत या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से से हो रही है।
संभावित कारण
- डाइवर्टिकुलर डिजीज
- इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)
- कोलन पॉलीप्स
- कोलोरेक्टल कैंसर
3. काला और चिपचिपा मल
अगर मल कोलतार (Tar) की तरह काला और चिपचिपा दिखाई दे, तो यह ऊपरी पाचन तंत्र जैसे पेट या छोटी आंत में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है।
संभावित कारण
- पेट का अल्सर
- गैस्ट्राइटिस
- इसोफेगल वैरीसीज
- पेट या डुओडेनम में ब्लीडिंग
मल में खून आने के प्रमुख कारण
बवासीर
बवासीर रेक्टल ब्लीडिंग का सबसे आम कारण है। इसमें गुदा की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे मल त्याग के दौरान दर्द, जलन और चमकीला लाल खून दिखाई दे सकता है।
गुदा में दरार (Anal Fissure)
कब्ज या बहुत कठोर मल निकलने की वजह से गुदा की त्वचा फट सकती है, जिससे दर्द और खून आने की समस्या होती है।
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)
क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियां आंतों में सूजन पैदा करती हैं। इसके कारण मल में खून, पेट दर्द, दस्त और वजन कम होने की शिकायत हो सकती है।
डाइवर्टिकुलर डिजीज
बड़ी आंत की दीवार में बने छोटे पाउच में सूजन या फटने की वजह से ब्लीडिंग हो सकती है।
कोलन पॉलीप्स
आंत में बने कुछ पॉलीप्स धीरे-धीरे खून आने का कारण बन सकते हैं। समय पर इलाज न होने पर कुछ पॉलीप्स कैंसर में बदल सकते हैं।
कोलोरेक्टल कैंसर
यदि मल में बार-बार खून आए, वजन तेजी से घटे, कमजोरी महसूस हो और मल त्याग की आदतों में बदलाव हो, तो यह कोलोरेक्टल कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि मल में खून आने के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- बार-बार मल में खून आना
- काला या टार जैसा मल
- लगातार पेट दर्द
- बिना कारण वजन कम होना
- कमजोरी या चक्कर आना
- एनीमिया के लक्षण
- मल त्याग की आदतों में अचानक बदलाव
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि एक-दो बार हल्का खून दिखाई दे, तब भी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। लेकिन यदि खून बार-बार आए, मात्रा अधिक हो या उसके साथ पेट दर्द, बुखार, उल्टी, कमजोरी या वजन कम होने जैसी शिकायत हो, तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।
क्या मल में खून आने से बचाव किया जा सकता है?
कुछ मामलों में इसका खतरा कम किया जा सकता है।
- फाइबर युक्त भोजन करें।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- कब्ज से बचें।
- नियमित व्यायाम करें।
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
- 45 वर्ष की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह पर कोलन कैंसर की स्क्रीनिंग कराएं।
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