छत्तीसगढ़ के इस रूट पर ₹755 करोड़ से बनेगी तीसरी लाइन, कोयला संकट होगा दूर!
देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। कोयला परिवहन (Coal Transport) को और ज्यादा मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ के एक बेहद महत्वपूर्ण रेल रूट के विस्तार का फैसला किया है। रेलवे ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के तहत आने वाले चांपा-कोरबा रेल खंड पर तीसरी रेल लाइन बनाने के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 755 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
रेलवे के इस बड़े फैसले से न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के पावर प्लांट्स को समय पर कोयला मिल सकेगा, जिससे आने वाले समय में बिजली संकट का खतरा पूरी तरह टल जाएगा।
भारत की ‘ऊर्जा राजधानी’ कोरबा को मिलेगा नया बूस्टर
बता दें कि छत्तीसगढ़ के कोरबा को देश की “ऊर्जा राजधानी” (Energy Capital of India) कहा जाता है। यहां कई बड़े-बड़े थर्मल पावर प्लांट स्थित हैं और यह इलाका देश के सबसे प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
वर्तमान में चांपा-कोरबा रेल लाइन साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) की खदानों को देश के मुख्य मुंबई-हावड़ा रेल रूट से जोड़ती है। रेलवे के ‘मिशन 3000 एमटी’ और ‘हाई-डेंसिटी नेटवर्क’ (HDN) के तहत इस रूट को अपग्रेड करना बेहद जरूरी हो गया था, ताकि देश में कोयले की सप्लाई बिना किसी रुकावट के चलती रहे।
हर साल 200 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला ढुलाई का प्लान
इस रूट पर बढ़ते ट्रैफिक का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वर्तमान में इस सिंगल/डबल ट्रैक पर हर दिन 10 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें और करीब 55 जोड़ी मालगाड़ियां दौड़ रही हैं। आने वाले समय में SECL और MCL का कोयला उत्पादन 247 मिलियन टन से बढ़कर 450 मिलियन टन सालाना होने की उम्मीद है।
उत्पादन बढ़ने से रेलवे पर करीब 200 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला परिवहन का दबाव बढ़ेगा। इसी भविष्य की जरूरत को देखते हुए चांपा और कोरबा के बीच इस 42 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन को मंजूरी दी गई है (इसमें पहले से स्वीकृत मड़वारानी-सरगबुंदिया हिस्से को शामिल नहीं किया गया है)।
आम जनता और रेलवे को क्या-क्या फायदे होंगे?
इस तीसरी रेल लाइन के बन जाने से छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी और देश की अर्थव्यवस्था को कई बड़े फायदे होने वाले हैं:
- नई ट्रेनों की शुरुआत: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इस रूट पर दोनों तरफ से 2-2 नई पैसेंजर ट्रेनें चलाई जा सकेंगी, जिससे स्थानीय यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- मालगाड़ियों की लेट-लतीफी होगी खत्म: अभी इस रूट पर ट्रैक खाली न होने की वजह से मालगाड़ियों को काफी इंतजार करना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की देरी खत्म होगी, जिससे रेलवे के हर साल करीब 1.30 करोड़ रुपये बचेंगे।
- रेलवे की बंपर कमाई: इस नई लाइन से हर साल 5.95 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई हो सकेगी। इससे रेलवे को सालाना लगभग 85 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा होगा (82 करोड़ माल ढुलाई से और 3 करोड़ यात्री किराए से)।
भारतीय रेलवे का यह मेगा प्रोजेक्ट देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने और आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
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