Home Loan Tips: सैलरी का सिर्फ इतने % रखें होम लोन की किस्त, कभी नहीं होगी पैसों की तंगी
Home Loan Tip;हर इंसान का सपना होता है कि उसका अपना एक आलीशान और खूबसूरत घर हो। लेकिन कई बार सीमित बजट और पैसों की कमी के चलते लोग इस सपने को पूरा करने से कतराते हैं या फिर भारी तनाव में आ जाते हैं। अगर आप भी अपने सपनों का घर खरीदना चाहते हैं और फंड्स की कमी आड़े आ रही है, तो अब घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
आज के दौर में ज्यादातर लोग होम लोन (Home Loan) की मदद से ही अपने मकान का सपना पूरा कर रहे हैं। लोन लेना कोई समझदारी की कमी नहीं है, बशर्ते आपकी प्लानिंग सही हो। हम आपके साथ एक ऐसी बेहतरीन फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी शेयर करने जा रहे हैं, जिससे आप यह सटीक अंदाजा लगा पाएंगे कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में जाना चाहिए ताकि आपका मंथली बजट कभी न बिगड़े।
होम लोन: एक लंबी अवधि की जिम्मेदारी (Long-Term Liability)
होम लोन को हमेशा एक लॉन्ग-टर्म लायबिलिटी यानी लंबी अवधि के कर्ज के रूप में देखा जाना चाहिए। आमतौर पर लोग 15 से 30 साल तक की अवधि के लिए होम लोन लेते हैं। चूंकि इसकी मासिक किस्त (EMI) हर महीने सीधे आपकी कमाई से कटती है, इसलिए लोन की राशि तय करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
लोन लेते समय आंख मूंदकर बैंक के ऑफर पर भरोसा न करें। अगर कोई बैंक आपकी रीपेमेंट क्षमता (Repayment Capacity) से ज्यादा का लोन ऑफर कर रहा है, तो समझदारी इसी में है कि आप उस ऑफर को सीधे मना कर दें। केवल उतना ही कर्ज लें, जिसे आप हर महीने बिना किसी मानसिक तनाव के चुका सकें।
उन जरूरी खर्चों को न भूलें जहां समझौता असंभव है
घर की ईएमआई तय करने से पहले अपने उन फिक्स्ड मंथली खर्चों की एक लिस्ट जरूर बना लें, जिन्हें आप किसी भी कीमत पर टाल या कम नहीं कर सकते। इन जरूरी खर्चों में शामिल हैं:
- बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस
- लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम
- कार लोन या अन्य छोटे क्रेड्स की किस्तें
- रोजाना ऑफिस आने-जाने का फ्यूल और कन्वेंस खर्च
- मेडिकल इमरजेंसी और दवाइयों का खर्च
- भविष्य के लिए की जाने वाली जरूरी सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट्स
होम लोन की किस्त कटने के बाद आपके बैंक अकाउंट में इतनी रकम जरूर बचनी चाहिए कि आपके परिवार की ये सभी बुनियादी जरूरतें बेहद आराम से पूरी हो सकें।
थंब रूल: सैलरी के 30% से ज्यादा न हो Home Loan EMI
दिग्गज फाइनेंशियल प्लानर्स और एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपके होम लोन की मंथली EMI आपकी कुल इन-हैंड सैलरी (Net Monthly Income) के 30 फीसदी से अधिक कभी नहीं होनी चाहिए। अगर आप इस 30% के गोल्डन रूल का पालन करते हैं, तो आपको परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों में कटौती नहीं करनी पड़ेगी।
अक्सर लोग अपनी क्षमता से बड़ा घर खरीदने के चक्कर में बहुत बड़ा लोन ले लेते हैं। नतीजा यह होता है कि उनकी आधी से ज्यादा सैलरी लोन चुकाने में चली जाती है और आगे चलकर उन्हें बच्चों की हायर एजुकेशन जैसी महत्वपूर्ण चीजों पर समझौता करना पड़ता है।
मकान खरीदने से ज्यादा जरूरी है बच्चों की उच्च शिक्षा
आज के इस महंगाई के दौर में सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण इन्वेस्टमेंट आपके बच्चों की उच्च शिक्षा (Higher Education) है। जिस रफ्तार से पढ़ाई का खर्च बढ़ रहा है, उसे देखते हुए बच्चों को एक अच्छी और क्वालिटी एजुकेशन दिलाना कोई आसान काम नहीं रह गया है।
समझदार पैरेंट्स हमेशा बच्चों की पढ़ाई को अपनी प्रायोरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर रखते हैं। इसका सीधा सा कारण यह है कि बड़ा या आलीशान मकान तो आप जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर दोबारा लोन लेकर या पैसे जोड़कर खरीद सकते हैं, लेकिन अगर बच्चों की पढ़ाई और उनके करियर का सही समय एक बार हाथ से निकल गया, तो वह सुनहरा मौका जिंदगी में दोबारा कभी लौटकर नहीं आएगा। इसलिए घर जरूर खरीदें, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य की कीमत पर बिल्कुल नहीं।
