Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 जुलाई का कारोबारी सत्र बेहद निराशाजनक रहा। हफ्ते के मध्य में सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी से ठीक एक दिन पहले घरेलू शेयर बाजार में अचानक जबरदस्त बिकवाली का तूफान आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ जारी सीजफायर खत्म होने का ऐलान करने के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता फैल गई, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ा।
इस चौतरफा बिकवाली के चलते BSE सेंसक्स और NSE निफ्टी दोनों ही प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक 2-2 फीसदी से ज्यादा टूटकर बंद हुए। बाजार में मचे इस कोहराम की वजह से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में करीब ₹8.24 लाख करोड़ घटकर ₹4,71.43 लाख करोड़ रह गया। यानी चंद घंटों के भीतर निवेशकों की बड़ी रकम डूब गई।
सेंसेक्स-निफ्टी का क्या रहा हाल?
बुधवार को शेयर बाजार की शुरुआत से ही दबाव देखने को मिला, लेकिन दोपहर के सत्र में ट्रंप के बयान के बाद गिरावट और गहरी हो गई:
- सेंसेक्स (Sensex): दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,921.69 अंक तक टूटकर 76,259.03 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बंद होते-होते यह 1,677.12 अंक (2.15%) की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ।
- निफ्टी 50 (Nifty 50): निफ्टी में भी जोरदार बिकवाली दिखी और यह इंट्रा-डे में 23,805.20 का लो छूने के बाद 516.65 अंक (2.12%) फिसलकर 23,882.04 पर क्लोज हुआ।
ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का जबरदस्त माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स डेढ़ फीसदी से ज्यादा गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद
बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि सेंसेक्स में शामिल सभी 30 के 30 स्टॉक्स गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए। इंडिगो (InterGlobe Aviation), मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), जियो फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस जैसे दिग्गज शेयर टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
सेक्टरवाइज प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए:
- बैंकिंग सेक्टर: पीएसयू और प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में सबसे ज्यादा 2.5% से अधिक की गिरावट आई।
- एफएमसीजी व ऑटो: निफ्टी एफएमसीजी में लगभग 2.5% और ऑटो सेक्टर में 2% से ज्यादा का कट देखा गया।
- आईटी सेक्टर: निफ्टी आईटी इंडेक्स भी बिकवाली के दबाव से अछूता नहीं रहा और 1% से ज्यादा नीचे गिरकर बंद हुआ।
बाजार में क्यों आया यह बड़ा क्रैश?
- अमेरिका-ईरान तनाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान के साथ interim ceasefire अब समाप्त हो चुका है। इसके साथ ही Strait of Hormuz में जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका द्वारा नए एयरस्ट्राइक्स की खबर से वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया।
- क्रूड ऑयल में उछाल: मध्य-पूर्व (West Asia) में तनाव बढ़ने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें उछल गईं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चा तेल महंगा होना महंगाई और चालू खाते के घाटे (CAD) के लिहाज से चिंताजनक है।
- रुपये में कमजोरी: वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल के महंगा होने से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 59 पैसे टूटकर 95.55 के स्तर पर आ गया, जिससे सेंटीमेंट और ज्यादा बिगड़ गया।
116 शेयर पहुंचे एक साल के हाई पर
गिरावट के इस माहौल के बीच बीएसई पर कुल 4,454 शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इनमें से केवल 1,070 शेयर बढ़त बनाने में कामयाब रहे, जबकि 3,211 शेयरों में गिरावट आई और 173 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। इसके अलावा, जहां 104 शेयर अपने 52-वीक लो (एक साल के निचले स्तर) पर फिसल गए, वहीं 116 शेयर ऐसे भी रहे जिन्होंने भारी गिरावट के बावजूद अपने 52-वीक हाई (एक साल के उच्चतम स्तर) को छुआ।










